Chanchal Sharma

बेडरूम का वास्तु: प्रेम, स्वास्थ्य और शांति के लिए सर्वोत्तम दिशा (Bedroom Vastu: Best Directions for Love, Health & Peace)

बेडरूम का वास्तु

क्यों जरूरी है बेडरूम का वास्तु? बेडरूम किसी भी घर का सबसे निजी, शांति और ऊर्जा का केंद्र होता है। यह वह स्थान है जहाँ हम दिन भर की थकान को दूर करते हैं, अपने प्रियजनों के साथ समय बिताते हैं और मानसिक तथा शारीरिक रूप से पुनः ऊर्जा प्राप्त करते हैं। वास्तु शास्त्र के […]

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घर के मुख्य द्वार का वास्तु: समृद्धि और सौभाग्य का प्रवेश द्वार कैसे बनाएं (Main Entrance Vastu Tips for Prosperity)

मुख्य द्वार वास्तु टिप्स

घर के मुख्य द्वार का वास्तु घर का मुख्य द्वार न केवल प्रवेश का मार्ग होता है, बल्कि वही घर में ऊर्जा, समृद्धि और सकारात्मकता के प्रवेश द्वार का भी प्रतीक होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार मुख्य द्वार का स्थान, दिशा और सजावट घर के भाग्य पर गहरा प्रभाव डालते हैं। सही तरीके से

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त्रिजुटी रुद्राक्ष की सम्पूर्ण जानकारी – लाभ, पहनने की विधि, मंत्र और सावधानियाँ।

त्रिजुटी रुद्राक्ष

त्रिजुटी रुद्राक्ष का परिचय: त्रिजुटी रुद्राक्ष तीन प्राकृतिक रुद्राक्ष दानों से बना होता है, जो जन्म से ही आपस में जुड़े होते हैं। इसे त्रिदेवों का प्रतीक माना जाता है — ब्रह्मा (सृजन), विष्णु (पालन) और महेश (संहार)। यह रुद्राक्ष उन साधकों के लिए अत्यंत दिव्य और दुर्लभ माना जाता है, जो तीनों शक्तियों को

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गरभ गौरी रुद्राक्ष की सम्पूर्ण जानकारी – लाभ, पहनने की विधि, मंत्र और सावधानियाँ।

गरभ गौरी रुद्राक्ष

गरभ गौरी रुद्राक्ष का परिचय: गरभ गौरी रुद्राक्ष को माँ पार्वती और उनके गर्भस्थ पुत्र गणेश जी का दिव्य स्वरूप माना जाता है। यह रुद्राक्ष विशेष रूप से संतान सुख, मातृत्व की प्राप्ति, गर्भधारण में सहायता, और माँ-बच्चे के रिश्ते में मजबूती के लिए अत्यंत शुभ और प्रभावशाली माना गया है। यह रुद्राक्ष स्त्रियों के

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गौरी शंकर रुद्राक्ष की सम्पूर्ण जानकारी – लाभ, पहनने की विधि, मंत्र और सावधानियाँ।

गौरी शंकर रुद्राक्ष 1

गौरी शंकर रुद्राक्ष का परिचय: गौरी शंकर रुद्राक्ष दो प्राकृतिक रूप से जुड़े हुए रुद्राक्ष दानों से बना होता है, जिन्हें माँ पार्वती (गौरी) और भगवान शिव (शंकर) का स्वरूप माना जाता है। यह रुद्राक्ष प्रेम, एकता, वैवाहिक सुख, आध्यात्मिक संतुलन और शिव-शक्ति की कृपा का प्रतीक है। यह उन लोगों के लिए अत्यंत फलदायी

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21 मुखी रुद्राक्ष की सम्पूर्ण जानकारी – लाभ, पहनने की विधि, मंत्र और सावधानियाँ।

21 मुखी रुद्राक्ष

21 मुखी रुद्राक्ष का परिचय: 21 मुखी रुद्राक्ष को भगवान कुबेर का प्रतीक माना जाता है — देवताओं के कोषाध्यक्ष और धन-समृद्धि के स्वामी। यह रुद्राक्ष संपूर्ण रुद्राक्षों में सबसे दुर्लभ और शक्तिशाली माना गया है। जो इसे धारण करता है, उसे अचल धन, संपत्ति, सामर्थ्य, और लोक-परलोक में विजय की प्राप्ति होती है। यह

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20 मुखी रुद्राक्ष की सम्पूर्ण जानकारी – लाभ, पहनने की विधि, मंत्र और सावधानियाँ।

20 मुखी रुद्राक्ष

20 मुखी रुद्राक्ष का परिचय: 20 मुखी रुद्राक्ष को भगवान ब्रह्मा का स्वरूप माना गया है, जो सृष्टि के रचयिता हैं। यह रुद्राक्ष ज्ञान, सृजन, नवाचार और ब्रह्माण्डीय चेतना का प्रतीक है। इसे धारण करने से व्यक्ति में सर्जनात्मक शक्ति, उच्च बौद्धिक क्षमता, आध्यात्मिक चेतना और दिव्य प्रेरणा का विकास होता है। यह अत्यंत दुर्लभ

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19 मुखी रुद्राक्ष की सम्पूर्ण जानकारी – लाभ, पहनने की विधि, मंत्र और सावधानियाँ।

19 मुखी रुद्राक्ष

19 मुखी रुद्राक्ष का परिचय: 19 मुखी रुद्राक्ष को भगवान नारायण (विष्णु के नर-नारायण स्वरूप) का प्रतीक माना जाता है। यह रुद्राक्ष संपूर्ण जीवन में सफलता, समृद्धि, विजय और इच्छाओं की पूर्ति प्रदान करता है। इसे धन, धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष – चारों पुरुषार्थों को साधने वाला रुद्राक्ष कहा गया है। यह अत्यंत दुर्लभ,

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18 मुखी रुद्राक्ष की सम्पूर्ण जानकारी – लाभ, पहनने की विधि, मंत्र और सावधानियाँ।

18 मुखी रुद्राक्ष

18 मुखी रुद्राक्ष का परिचय: 18 मुखी रुद्राक्ष को माँ भुवनेश्वरी का स्वरूप माना जाता है। यह रुद्राक्ष भूमि सुख, स्थिरता, समृद्धि, शक्ति और शांति का अद्भुत संगम है। इसे धारण करने वाला व्यक्ति न केवल भौतिक रूप से समृद्ध होता है, बल्कि उसके भीतर आध्यात्मिक संतुलन और मातृ ऊर्जा का जागरण होता है। यह

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17 मुखी रुद्राक्ष की सम्पूर्ण जानकारी – लाभ, पहनने की विधि, मंत्र और सावधानियाँ।

17 मुखी रुद्राक्ष

17 मुखी रुद्राक्ष का परिचय: 17 मुखी रुद्राक्ष को माँ कात्यायनी और भगवान विष्णु का संयुक्त स्वरूप माना गया है। यह रुद्राक्ष अत्यंत दुर्लभ और दिव्य है, जो धन, संतान सुख, आध्यात्मिक जागरण और सौभाग्य का प्रतीक है।इसे सप्तदशमुखी रुद्राक्ष भी कहा जाता है, जो धारक को भोग और मोक्ष दोनों प्रदान करने की क्षमता

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