Shiv Ji Ke Bhajan Lyrics | शिव जी के भजन लिरिक्स

सज रहे भोले बाबा निराले दूल्हे में भजन लिरिक्स | Saj Rahe Bhole Baba Nirale Dulhe Mein Bhajan Lyrics

🕉 1 मिनट पढ़ें · अंतिम अपडेट: 1 मई 2026
Saj Rahe Bhole Baba Nirale Dulhe Mein Lyrics
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सज रहे भोले बाबा निराले दूल्हे में — महाशिवरात्रि का शाश्वत भजन

भगवान शिव — देवों के देव महादेव, भोलेनाथ। सरल, सहज, अपने भक्तों के लिए सबसे सुलभ — उनकी एक ही पुकार पर वे प्रकट होते हैं। शिव की दो छवियां प्रसिद्ध हैं — एक तपस्वी रूप (कैलाश पर ध्यानमग्न), दूसरा गृहस्थ रूप (पार्वती के साथ)। यह भजन ‘सज रहे भोले बाबा निराले दूल्हे में’ — दूसरे रूप का गायन है।

भारतीय परंपरा में शिव-पार्वती का विवाह सर्वाधिक पवित्र दिव्य-विवाह माना जाता है। फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी — महाशिवरात्रि — को इसी दिन बाबा भोलेनाथ का पार्वती से विवाह हुआ था। ‘निराला दूल्हा’ — क्योंकि भांग-धतूरे, नागों और भूत-गणों की बारात लेकर आए थे। बैल पर सवार, भस्म चढ़ाए, बाघम्बर ओढ़े — यह दूल्हा साधारण नहीं, अलौकिक था।

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यह भजन कन्हैया मित्तल, अनूप जलोटा जैसे अनेक गायकों ने अमर किया है। महाशिवरात्रि पर हर शिव-मंदिर में, हर सत्संग में यह भजन गूँजता है। हर पंक्ति में शिव की ‘भोले’ छवि — सरल, मस्त, और अद्वितीय — जीवंत होती है।

सज रहे भोले बाबा निराले दूल्हे में भजन लिरिक्स | Saj Rahe Bhole Baba Nirale Dulhe Mein Bhajan Lyrics

सज रहे भोले बाबा निराले दूल्हे में
निराले दूल्हे में, मतवाले दूल्हे में
सज रहे भोले बाबा निराले दूल्हे में,

अरे देखो भोले बाबा की अजब है बात
चले हैं संग ले कर के भूतों की बरात
सज रहे भोले बाबा निराले दूल्हे में,

भेस निराला, जय हो
पीए भंग का पायला, जय हो
सर जटा चढ़ाये, जय हो
तन भसम लगाए, जय हो
ओढ़ी मृगशाला, जय हो
गले नाग की माला, जय हो
है शीश पे गंगा, जय हो
मस्तक पे चंदा, जय हो
तेरे डमरू साजे, जय हो
त्रिशूल विराजे, जय हो
भूतों की ले कर टोली चले हैं ससुराल
शिव भोले जी दिगंबर हो बैल पे सवार
सज रहे भोले बाबा निराले दूल्हे में,

नित रहें अकेले शंकर अलबेले
हैं गुरु जगत के नहीं किसी के चेले
है भांग का जंगल जंगल में मंगल

भूतों की पल्टन आ गयी है बन थन
ले बांग का कठ्ठा
ले कर सिल वट्टा
सब घिस रहें है
हो हक्का बक्का
पी कर के प्याले
हो गए मतवाले
कोई नाचे गावे
कोई ढोल बजावे
कोई भौं बतावे
कोई मुंह पिचकावे
भोले भंडारी पहुंचे ससुरारी
सब देख के भागे
सब नर और नारी
कोई भागे अगाडी
कोई भागे पिछाड़ी
खुल गयी किसी की
धोती और साडी
कोई कूदे खम्बम
कोई बोले बम बम
कोई कद का छोटा
कोई एकदम मोटा
कोई तन का लम्बा
कोई ताड़ का खम्बा
कोई है इक टंगा
कोई बिलकुल नंगा
कोई एकदम काला
कोई दो सर वाला

भक्तिभावना’ गुण गए

मन में हर्षाए
त्रिलोक के स्वामी
क्या रूप बनाए
भोले के साथी
हैं अजब बाराती

भूतों की ले कर टोली चले हैं ससुराल
शिव भोले जी दिगंबर हो बैल पे सवार
सज रहे भोले बाबा निराले दूल्हे में ||

इस शिव भजन लिरिक्स में भक्त भगवान शिव की पूजा और भक्ति के अद्वितीय आदर्श को प्रकट करता है। इस भजन में भक्त शिव के निराले और अद्वितीय स्वरूप की महिमा करते हैं, और वे उनके विभिन्न आवाताओं और धार्मिक गुणों की प्रशंसा करते हैं। इसके अलावा, भक्त इस भजन के माध्यम से भगवान शिव के साथी और सहयोगी होने के संदेश को भी प्रस्तुत करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  1. ‘सज रहे भोले बाबा निराले दूल्हे में’ किस अवसर पर गाया जाता है? — प्रमुख रूप से महाशिवरात्रि (फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी, फरवरी-मार्च) पर — जब शिव-पार्वती विवाह की रात्रि का स्मरण किया जाता है। सावन सोमवार, प्रदोष व्रत, शिवरात्रि-कीर्तन में भी।
  2. शिव जी ‘निराले दूल्हे’ क्यों कहलाते हैं? — शिव की बारात साधारण नहीं थी — भूत-प्रेत, गण, नाग, बेताल सब के साथ; भांग-धतूरा, भस्म-चिता-लेप; बैल वाहन; बाघम्बर। हर तरह से ‘विचित्र’ और ‘अद्वितीय’ — इसलिए ‘निराले दूल्हे’। पार्वती के माता-पिता पहले डर गए थे, फिर शिव के असली स्वरूप का दर्शन पाकर अभिभूत हुए।
  3. महाशिवरात्रि का व्रत कैसे करें? — पूरे दिन निराहार उपवास या फलाहार। चार प्रहर की पूजा (रात्रि में) — दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल से अभिषेक। ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप, बेलपत्र-धतूरा-चंदन अर्पण, शिव-तांडव स्तोत्र पाठ। अगले दिन सूर्योदय पर पारणा।
  4. शिव की पूजा में क्या वर्जित है? — शिव-लिंग पर तुलसी, हल्दी, केतकी पुष्प, कुमकुम, सिंदूर वर्जित। केवल बेलपत्र, धतूरा, सफेद पुष्प, चंदन, भस्म स्वीकार्य। प्रसाद रूप में नैवेद्य चढ़ाने के बाद उसी प्रसाद को ग्रहण न करें (शिव-निर्माल्य नियम)।
  5. शिव-संबंधित अन्य लोकप्रिय भजन कौन से हैं? — ‘शिव शंकर को जिसने पूजा’, ‘भोले बाबा है मस्ती में’, ‘है शिव शंकर भोले मेरे’, ‘ओम जय शिव ओमकारा’ (आरती), ‘शिव तांडव स्तोत्र’, ‘चलो भोले बाबा के द्वार’। महाशिवरात्रि-संध्या पर सभी एक के बाद एक गाए जाते हैं।
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