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गणेश जी की आरती लिरिक्स लिखित में। Ganesh Ji Aarti Lyrics [ PDF के साथ ]

🕉 1 मिनट पढ़ें · अंतिम अपडेट: 11 सितम्बर 2024
ganesh ji ki aarti ke lyrics
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इस ब्लॉग के माध्यम से हम आपके लिए लेकर आये हैं Ganesh ji aarti lyrics और गणेश पूजन से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारी। गणेश जी मंगलकर्ता और विघ्नहर्ता हैं। गणेश जी के आशीर्वाद से सभी काम सिद्ध होते हैं। गणेश जी की पूजा करने से घर में सुख और समृद्धि बनी रहती है। आप नीचे लिंक पर क्लिक करके गणेश जी की इस भव्य आरती को PDF में डाउनलोड कर सकते हैं। 

॥ श्री गणेशजी की आरती ॥

जय गणेश, जय गणेश,जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा॥ x2

एकदन्त दयावन्त,चार भुजाधारी।
माथे पर तिलक सोहे,मूसे की सवारी॥ x2

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माथे पर सिन्दूर सोहे,मूसे की सवारी।
पान चढ़े फूल चढ़े,और चढ़े मेवा॥ x2

हार चढ़े, फूल चढ़े,और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे,सन्त करें सेवा॥ x2

जय गणेश, जय गणेश,जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा॥ x2

अँधे को आँख देत,कोढ़िन को काया।
बाँझन को पुत्र देत,निर्धन को माया॥ x2

सूर’ श्याम शरण आए,सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा॥ x2

दीनन की लाज राखो,शम्भु सुतवारी।
कामना को पूर्ण करो,जग बलिहारी॥ x2

जय गणेश, जय गणेश,जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा॥ x2

गणेश जी की आरती लिखित 
PDF डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करे !! 

इस ganesh ji aarti lyrics को गणेश चतुर्थी और अन्य गणेश पूजा अवसरों पर पढ़ा जाता है, जिसमें भगवान गणेश की महिमा का गुणगान किया जाता है। आरती के बोल व्यक्त करते हैं कि गणेश देव भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र हैं, जिनकी चार भुजाएं हैं और एक दांत है। उनके माथे पर तिलक है और उनकी सवारी मूषक है। गणेश जी के पूजन में हार व फूल अर्पित किये जाते हैं और मेवा व लड्डू का भोग चढ़ता है। इस ganesh ji ki aarti lyrics in hindi का संदेश यह है कि भक्तों को गणेश भगवान की पूजा करने से आशीर्वाद मिलता है और उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

गणेश जी की आरती करने की विधि (Ganesh Ji Ki Aarti Vidhi)

गणेश जी की आरती हिंदू धर्म में एक पवित्र अनुष्ठान मानी जाती है। भगवान गणेश को बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य का देवता माना जाता है। उनकी आरती से जीवन में आने वाली बाधाओं का नाश होता है और परिवार में सुख-शांति का वास होता है। यहां हम सरल विधि में गणेश जी की आरती करने का तरीका बता रहे हैं:

पूजा स्थल की तैयारी

आरती करने से पहले पूजा स्थल को अच्छे से स्वच्छ करें और गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर को लाल या पीले वस्त्र से सजाएं। पूजा स्थल पर धूप, दीप, अगरबत्ती, फूल, और जल रखें। साफ और सकारात्मक वातावरण में भगवान गणेश का स्वागत करें।

गणेश जी का ध्यान और पूजा सामग्री

आरती शुरू करने से पहले भगवान गणेश का ध्यान करें और “ॐ गण गणपतये नमः” मंत्र का जप करें। इसके बाद, पूजा के लिए निम्न सामग्री तैयार करें:

– शुद्ध घी का दीपक
– कपूर
– फूल और माला
– अक्षत (चावल)
– दूर्वा
– मिठाई (मोदक या लड्डू विशेष रूप से)

नोट: दूर्वा गणेश जी को अत्यधिक प्रिय है, और मोदक उनका विशेष भोग है। इन्हें अर्पित करने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं।

आरती की विधि

– सबसे पहले, घी का दीपक जलाएं और उसे भगवान गणेश के समक्ष रखें।
– गणेश जी को फूल, दूर्वा और अक्षत अर्पित करें।
– कपूर जलाकर, ताली बजाते हुए आरती शुरू करें। आरती के दौरान घंटी बजाएं और भगवान गणेश के जयकारे लगाएं जैसे “गणपति बप्पा मोरया!”।

नोट: ताली और घंटी बजाने से वातावरण शुद्ध होता है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। यह भक्ति का प्रतीक माना जाता है।

आरती की दिशा

– आरती करते समय दीपक को दक्षिणावर्त दिशा (घड़ी की दिशा) में घुमाएं।

– भगवान गणेश की मूर्ति के समक्ष घी का दीपक 5 बार और कपूर 3 बार घुमाएं।

नोट: दक्षिणावर्त दिशा में आरती करना शास्त्रों के अनुसार शुभ माना जाता है और यह हमारे समर्पण और भक्ति का प्रतीक है।

आरती के बाद की प्रक्रिया

– आरती समाप्त होने के बाद भगवान गणेश को नवविधि भोग (मोदक या मिठाई) अर्पित करें।

– आरती समाप्त होने के बाद सबको आरती दिखाकर उसका प्रसाद वितरित करें।

– आरती में बचे हुए कपूर और दीपक को ध्यानपूर्वक बुझाएं।

गणेश जी की आरती के समय बोलने वाला मंत्र

आरती के दौरान आप निम्न मंत्र का उच्चारण कर सकते हैं:

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।।

अर्थ: हे भगवान गणेश! आप महाकाय हैं, आपके शरीर से करोड़ों सूर्यों का प्रकाश निकलता है। मेरी सभी समस्याओं को दूर करके मेरा हर कार्य निर्विघ्न पूरा करें।

समर्पण और श्रद्धा का महत्त्व:

गणेश जी की आरती को पूरे समर्पण और श्रद्धा से किया जाता है। इसका उद्देश्य भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करना है, ताकि जीवन में आने वाली बाधाओं और विघ्नों से मुक्ति मिल सके। आरती के बाद प्रसाद का वितरण हमारी भक्ति और आशीर्वाद को सबके साथ बांटने का प्रतीक है।

 

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