मकर संक्रान्ति / पोंगल / लोहड़ी
सूर्य का उत्तरायण — वर्ष का शुभ अर्धांश आरम्भ। तमिलनाडु में पोंगल, पंजाब में लोहड़ी, असम में बिहू। तिल-गुड़ की मिठाइयाँ "तिल-गुड़ घ्या, गोड़-गोड़ बोला" के संग वितरित। गुजरात में पतंगबाजी।
द्रिक पंचांग के अनुसार 2026 की प्रामाणिक तिथियों सहित 28 प्रमुख त्योहार।
सूर्य का उत्तरायण — वर्ष का शुभ अर्धांश आरम्भ। तमिलनाडु में पोंगल, पंजाब में लोहड़ी, असम में बिहू। तिल-गुड़ की मिठाइयाँ "तिल-गुड़ घ्या, गोड़-गोड़ बोला" के संग वितरित। गुजरात में पतंगबाजी।
विद्या, संगीत एवं शिक्षा की देवी सरस्वती की पूजा। वसन्त ऋतु का आगमन। पीले वस्त्र, पुष्प एवं मिष्ठान्न प्रमुख। इस शुभ दिवस पर बालकों का अक्षरारम्भ संस्कार किया जाता है।
शिव की महान रात्रि — जिस पर शिव ने ताण्डव किया तथा पार्वती से विवाह किया, ऐसी मान्यता। भक्त दिनभर उपवास, रात्रि-जागरण, "ॐ नमः शिवाय" जप, दूध-मधु-दही-बिल्व-पत्र से रुद्राभिषेक एवं शिवालय-दर्शन करते हैं।
होली पूर्व सायं — होलिका-दहन। प्रह्लाद की होलिका से विष्णु-कृपा से रक्षा का स्मरण। बुराई, अहंकार एवं नकारात्मकता का प्रतीकात्मक दहन। समाज एकत्रित होकर अग्नि के चारों ओर गायन तथा गेहूँ, नारियल, अन्न अर्पित।
रंगों का पर्व — असत्य पर सत्य की विजय एवं वसन्त-स्वागत। गुलाल-जल का परस्पर वितरण; वृन्दावन में राधा-कृष्ण लीला; भांग एवं ठण्डाई पारम्परिक। होलिका-दहन के पश्चात।
अनेक क्षेत्रों में हिन्दू नव वर्ष। ब्रह्मा द्वारा सृष्टि-रचना तथा भगवान राम की लंका विजय का दिन। महाराष्ट्र में "गुड़ी" फहराई जाती है; आंध्र-कर्नाटक में नीम-गुड़ की चटनी।
भगवान विष्णु के सप्तम अवतार श्रीराम का जन्मोत्सव। भक्त उपवास रखते हैं, रामचरितमानस अथवा वाल्मीकि रामायण का पाठ करते हैं, भजन-शोभायात्रा एवं अयोध्या के राम जन्मभूमि के दर्शन।
भक्ति, बल एवं निःस्वार्थ सेवा के मूर्तरूप श्रीहनुमान का जन्मोत्सव। भक्त हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, उपवास रखते हैं तथा हनुमान मन्दिरों के दर्शन।
अक्षय शुभ दिवस — कोई भी नया कार्य, दान, स्वर्ण क्रय अथवा कार्य-आरम्भ अविनाशी फल देता है। त्रेता युग का प्रारम्भ तथा पाण्डवों को अक्षय पात्र-प्राप्ति का दिन।
भगवान बुद्ध की त्रिविध जयन्ती — जन्म, बोधि एवं महापरिनिर्वाण। प्रमुख बौद्ध पर्व; हिन्दू परम्परा में विष्णु के नवम अवतार के प्राकट्य का दिन।
सुहागिन स्त्रियाँ पति की दीर्घायु हेतु उपवास रखती हैं तथा वट वृक्ष की परिक्रमा कर पवित्र सूत्र बाँधती हैं — सती सावित्री द्वारा यमराज से सत्यवान को वापस लाने की कथा।
पुरी (ओडिशा) में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र एवं सुभद्रा की वार्षिक रथ-यात्रा। तीन विशाल काष्ठ-रथ सहस्रों भक्तों द्वारा मुख्य मन्दिर से गुण्डिचा मन्दिर तक खींचे जाते हैं।
अपने गुरुजनों — आध्यात्मिक, शैक्षिक एवं जीवन-मार्गदर्शकों — के सम्मान का दिवस। व्यास पूर्णिमा भी, महर्षि व्यास का जन्मोत्सव।
शिव-पार्वती के सहस्रों वर्ष की तपस्या के पश्चात् पुनर्मिलन का उत्सव। सुहागिन स्त्रियाँ हरी साड़ी एवं लाल चूड़ियाँ धारण कर पुष्प-झूलों पर झूलती हैं।
भाई-बहन के स्नेह का पर्व। बहनें भाइयों की कलाई पर पवित्र सूत्र (राखी) बाँधती हैं — स्नेह तथा रक्षा-संकल्प का प्रतीक। महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्रों में नारळी पूर्णिमा।
भगवान विष्णु के अष्टम अवतार श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव। भक्त मध्यरात्रि तक उपवास रखते हैं, भगवद्गीता-भागवत पुराण पाठ, दही-हाण्डी।
विघ्न-नाशक एवं नूतन-आरम्भ के अधिपति श्रीगणेश का जन्मोत्सव। मिट्टी की प्रतिमा घर तथा पण्डाल में 1, 3, 5, 7 अथवा 10 दिन तक स्थापित कर अनन्त चतुर्दशी को जल-विसर्जन। महाराष्ट्र में विशाल आयोजन।
पूर्वजों के स्मरण एवं तर्पण की सोलह दिवसीय अवधि। प्रतिदिन तर्पण; पूर्वज की तिथि पर विशेष पिण्डदान-श्राद्ध। इस अवधि में नया कार्य नहीं।
देवी दुर्गा के नौ रूपों की नौ रात्रियाँ। उपवास, दुर्गासप्तशती-पाठ, गुजरात में गरबा-डाण्डिया, बंगाल में दुर्गा-पूजा।
राम-रावण विजय एवं दुर्गा-महिषासुर वध। रावण-दहन, शस्त्र-पूजा। नए कार्यारम्भ हेतु अति शुभ।
सुहागिन स्त्रियाँ पति की दीर्घायु हेतु निर्जल व्रत रखती हैं। चलनी से चन्द्र-दर्शन एवं पति-मुख दर्शन के पश्चात् व्रत-समापन।
दीपावली पञ्चाह्निक पर्व का प्रथम दिवस। देवी लक्ष्मी एवं भगवान धन्वन्तरि की पूजा। स्वर्ण-रजत-बर्तन क्रय हेतु अति शुभ।
प्रकाश-पर्व — दीपावली की केन्द्रीय रात्रि। राम जी की 14-वर्षीय वनवास के पश्चात् अयोध्या-वापसी। लक्ष्मी-गणेश पूजन, मिठाइयाँ, आतिशबाजी।
श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत को कनिष्ठा अंगुली पर उठाकर इन्द्र-प्रकोप से वृन्दावन की रक्षा का स्मरण। गोबर का छोटा पर्वत बनाकर पूजा; अन्नकूट कृष्ण को अर्पित।
बहनें भाइयों के मस्तक पर तिलक लगाकर दीर्घायु की कामना करती हैं। यमराज का अपनी बहन यमुना से मिलने का दिन।
पवित्र तुलसी का भगवान विष्णु (शालिग्राम) से विवाह। चातुर्मास के पश्चात् हिन्दू विवाह-मौसम का शुभारम्भ।
श्रीराम एवं सीताजी के दिव्य विवाह का स्मृति-दिवस। अयोध्या एवं जनकपुर (नेपाल) में विशेष।
भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कुरुक्षेत्र में अर्जुन को भगवद्गीता-उपदेश का दिन। 700 श्लोकों का पाठ।
उपरोक्त तिथियाँ नई दिल्ली के द्रिक पंचांग पर आधारित हैं — यह भारत का सर्वाधिक प्रयुक्त खगोलीय सन्दर्भ है। हिन्दू पंचांग चान्द्र-सौर होने के कारण मुम्बई, चेन्नई, बेंगलुरु जैसे महानगरों में सूर्योदय-भिन्नता से 1 दिन का अन्तर सम्भव है। किसी विशिष्ट तिथि की सटीक स्थानीय गणना हेतु दैनिक पंचांग देखें।