सूर्य यंत्र
नेतृत्व, जीवन-शक्ति, राज्य-कृपा, पिता से सम्बन्ध, आत्मविश्वास तथा शारीरिक स्वास्थ्य (हृदय, नेत्र, अस्थि) को बल देता है।
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
Om Hraam Hreem Hraum Sah Suryaya Namah
केन्द्रित संकल्प के यन्त्र — 9 ग्रह यन्त्र + श्री / महालक्ष्मी / वास्तु
नेतृत्व, जीवन-शक्ति, राज्य-कृपा, पिता से सम्बन्ध, आत्मविश्वास तथा शारीरिक स्वास्थ्य (हृदय, नेत्र, अस्थि) को बल देता है।
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
Om Hraam Hreem Hraum Sah Suryaya Namah
भावनात्मक अशांति का शमन, मानसिक शान्ति, निद्रा, माता से सम्बन्ध, अंतर्ज्ञान तथा जल-तत्त्व सुख को सहायक।
ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः
Om Shraam Shreem Shraum Sah Chandramase Namah
साहस, ऊर्जा, निर्णायक क्रिया, शत्रु-प्रतिरोध, भूमि लाभ तथा मांगलिक दोष शान्ति में सहायक।
ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः
Om Kraam Kreem Kraum Sah Bhaumaya Namah
बुद्धि, संवाद, व्यावसायिक कौशल, गणितीय व विश्लेषणात्मक क्षमता, स्नायु-तन्त्र स्वास्थ्य तथा अल्प-दूरी सफलता में वृद्धि।
ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः
Om Braam Breem Braum Sah Budhaya Namah
ज्ञान, सात्विक धन, सन्तान, शिक्षा, दाम्पत्य सुख (विशेषतः स्त्रियों हेतु), आध्यात्मिक गहराई तथा दीर्घकालिक रक्षा प्रदान करता है।
ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः
Om Graam Greem Graum Sah Gurave Namah
प्रेम, विवाह, सौन्दर्य, कलात्मक अभिव्यक्ति, ऐश्वर्य, वाहन तथा सौहार्दपूर्ण सम्बन्धों को बल देता है।
ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः
Om Draam Dreem Draum Sah Shukraya Namah
साढ़ेसाती, ढैया तथा शनि-जनित विलम्ब का शमन। स्थिरता, अनुशासन, आयु, भूमि सुख तथा कर्म-संतुलन प्रदान करता है।
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
Om Praam Preem Praum Sah Shanaishcharaya Namah
राहु महादशा की अशान्ति, अकस्मात विघटन, छल, विदेश-सम्बन्धी बाधा, व्यसन तथा अनिर्वचनीय चिन्ता को संतुलित करता है।
ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः
Om Bhraam Bhreem Bhraum Sah Rahave Namah
केतु-जनित भ्रम, आकस्मिक हानि, त्वचा रोग, एकाकीपन निवारण तथा मोक्ष-पथ को त्वरित करता है।
ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः
Om Sraam Sreem Sraum Sah Ketave Namah
समस्त यंत्रों का राजा। समृद्धि, ऐश्वर्य, ऊर्जा-संतुलन, आध्यात्मिक उत्थान तथा शिव-शक्ति चेतना के संगम का सार्वभौमिक स्रोत। हर घर अथवा व्यापार की वेदी हेतु उपयुक्त।
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः
Om Shreem Hreem Shreem Kamale Kamalalaye Praseed Praseed Shreem Hreem Shreem Om Mahalakshmyai Namah
विशेष रूप से भौतिक धन, आर्थिक स्थिरता, व्यापार वृद्धि, ऋण-मुक्ति तथा स्थायी समृद्धि हेतु। दीपावली के दिन प्रतिष्ठापित करना सर्वाधिक फलदायक।
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
Om Shreem Hreem Shreem Mahalakshmyai Namah
भवन, कार्यालय, कारखाने तथा भूखंड में वास्तु दोषों का बिना संरचनात्मक परिवर्तन निवारण। पाँच तत्त्वों एवं आठ दिशा-ऊर्जाओं का सामंजस्य।
ॐ वास्तोष्पते प्रति जानीह्यस्मान् स्वावेशो अनमीवो भवा नः
Om Vastoshpate Prati Janihy Asman Svaveso Anamivo Bhava Nah
यंत्र एक सूक्ष्मतापूर्वक रचित ज्यामितीय आरेख है, जो अपनी अनुपातों, मंत्रों एवं स्थापना-संकल्प के द्वारा देवता अथवा ग्रह की ऊर्जा को धारण करता है। शाब्दिक अर्थ "उपकरण" — मन को केंद्रित करने एवं सूक्ष्म ऊर्जा को नियंत्रित करने का साधन। ताम्र, रजत, स्वर्ण पर अंकित अथवा भोजपत्र पर रचित प्रत्येक यंत्र को स्थापना से पूर्व मंत्र-सहित प्राण-प्रतिष्ठा द्वारा ऊर्जान्वित किया जाता है। दैनिक दर्शन, स्पर्श अथवा मंत्र-जाप द्वारा निरंतर सम्पर्क इसके प्रभाव को कालांतर में बढ़ाता है।