यह सुंदर शिव स्तुति Shiv Stuti (शिव स्तोत्र Shiva Stotra)भगवान शिव को समर्पित स्तुति और श्रद्धा का एक भजन है, जो हिंदू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं, जो अपनी सर्वोच्च शक्ति, अनुग्रह और बुराई के विनाश के लिए जाने जाते हैं। यह भजन भगवान शिव के अनंत गुणों को समाहित करता है और ब्रह्मांड के निर्माता और विनाशक दोनों के रूप में उनकी भूमिका पर जोर देता है।
आशुतोष शशाँक शेखर,
चन्द्र मौली चिदंबरा,
कोटि कोटि प्रणाम शम्भू,
कोटि नमन दिगम्बरा ॥
निर्विकार ओमकार अविनाशी,
तुम्ही देवाधि देव,
जगत सर्जक प्रलय करता,
शिवम सत्यम सुंदरा ॥
निरंकार स्वरूप कालेश्वर,
महा योगीश्वरा,
दयानिधि दानिश्वर जय,
जटाधार अभयंकरा ॥
शूल पानी त्रिशूल धारी,
औगड़ी बाघम्बरी,
जय महेश त्रिलोचनाय,
विश्वनाथ विशम्भरा ॥
नाथ नागेश्वर हरो हर,
पाप साप अभिशाप तम,
महादेव महान भोले,
सदा शिव शिव संकरा ॥
जगत पति अनुरकती भक्ति,
सदैव तेरे चरण हो,
क्षमा हो अपराध सब,
जय जयति जगदीश्वरा ॥
जनम जीवन जगत का,
संताप ताप मिटे सभी,
ओम नमः शिवाय मन,
जपता रहे पञ्चाक्षरा ॥
आशुतोष शशाँक शेखर,
चन्द्र मौली चिदंबरा,
कोटि कोटि प्रणाम शम्भू,
कोटि नमन दिगम्बरा ॥
कोटि नमन दिगम्बरा..
कोटि नमन दिगम्बरा..
कोटि नमन दिगम्बरा..

शिव स्तुति: आशुतोष शशाँक शेखर – महिमा और अर्थ
भगवान शिव, जिन्हें आशुतोष (जल्दी प्रसन्न होने वाले) और शशाँक शेखर (जिनके मस्तक पर चंद्रमा विराजमान है) के नाम से भी जाना जाता है, सृष्टि के पालन, संहार, और पुनः सृजन के अधिपति हैं। यह स्तुति उनके उन अनंत गुणों और शक्ति का वर्णन करती है, जो उन्हें त्रिलोकीनाथ (तीनों लोकों के स्वामी) बनाते हैं।
शिव स्तुति की महिमा का वर्णन:
शिवजी को सदा ही भक्तों के प्रति उनकी दया, करुणा, और सरलता के लिए पूजनीय माना गया है। वह हर युग में सत्य और धर्म की रक्षा के लिए खड़े रहे हैं। चाहे वह समुद्र मंथन के समय हलाहल विष का पान हो या भक्तों की साधारण सी पूजा से प्रसन्न होने की बात, शिवजी का हर कार्य उनकी महानता और दया का प्रतीक है।
शिव स्तुति का अर्थ और महत्व:
आशुतोष: भगवान शिव को आशुतोष कहा जाता है, क्योंकि वह बिना किसी विशेष विधि-विधान के, सच्चे मन से की गई पूजा से ही प्रसन्न हो जाते हैं। यह स्तुति शिवजी के इस गुण की महिमा गाती है।
शशाँक शेखर: शिवजी का चंद्रमा धारण करना केवल सौंदर्य का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह उनकी शीतलता और धैर्य को दर्शाता है। इस स्तुति में इस विशेषता का गान किया गया है, जो हमें कठिन समय में भी शांत और स्थिर रहने की प्रेरणा देता है।
त्रिपुरारि: स्तुति में भगवान शिव को त्रिपुरारि (त्रिपुरासुर का संहार करने वाले) के रूप में भी स्मरण किया गया है। यह उनके संहारक रूप की महिमा करता है, जो अधर्म और असत्य को नष्ट करने के लिए आवश्यक है।
शिव स्तुति का महत्व:
यह स्तुति भगवान शिव के उन दिव्य गुणों की याद दिलाती है, जो हमें भी जीवन में सहनशीलता, दया, और सच्चाई के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। शिवजी की स्तुति केवल उनकी महिमा का गान नहीं है, बल्कि आत्मा को शांति और मानसिक शक्ति प्रदान करने का साधन भी है।
आशुतोष शशाँक शेखर स्तुति का नियमित जाप आपके जीवन में सकारात्मकता लाने, मनोबल बढ़ाने, और आपके भीतर निहित शक्ति को जागृत करने का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
शिव स्तुति का पाठ करने से लाभ:
मानसिक शांति और आत्मविश्वास में वृद्धि।
नकारात्मक ऊर्जा का नाश और सकारात्मक ऊर्जा का संचार।
भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का अवसर।
अपने जीवन को शिवमय बनाने के लिए इस स्तुति का पाठ करें और महादेव की अनंत कृपा का अनुभव करें। शिवजी की महिमा और उनका प्रेम हमेशा हमारे साथ बना रहे।
यहां पेज “शिव स्तुति:आसुतोष शशांक शेखर” से संबंधित कुछ संभावित प्रश्न और उत्तर दिए गए हैं |
Q1: शिव स्तुति क्या है और इसका क्या महत्व है?
उत्तर:
शिव स्तुति भगवान शिव के दिव्य गुणों, उनके सौंदर्य, दया, और शक्ति की स्तुति करने का माध्यम है। यह हमें महादेव की कृपा पाने, मन को शांत करने, और जीवन में सकारात्मकता लाने में मदद करती है। आशुतोष शशाँक शेखर स्तुति विशेष रूप से भगवान शिव की सरलता और उनकी कृपालुता का वर्णन करती है।
Q2: भगवान शिव को “आशुतोष” क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
“आशुतोष” का अर्थ है “जल्दी प्रसन्न होने वाले।” भगवान शिव को यह नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि वे अपने भक्तों की सच्चे मन से की गई पूजा से ही प्रसन्न हो जाते हैं, चाहे वह कितनी ही साधारण क्यों न हो। शिवजी अपनी दया और करुणा के लिए पूजनीय हैं।
Q3: शिवजी को “शशाँक शेखर” क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
शिवजी को “शशाँक शेखर” इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने अपने मस्तक पर चंद्रमा को धारण किया है। यह चंद्रमा उनकी शीतलता, धैर्य और सुंदरता का प्रतीक है। इसके साथ ही यह उनके भीतर संतुलन और शक्ति का भी प्रतीक है।
Q4: शिव स्तुति का जाप कैसे किया जाना चाहिए?
उत्तर:
शिव स्तुति का जाप सुबह या संध्या के समय, एक शांत और पवित्र स्थान पर बैठकर किया जाना चाहिए। इसे सच्चे मन और पूर्ण भक्ति से किया जाना चाहिए। स्तुति के साथ “ॐ नमः शिवाय” का उच्चारण भी लाभकारी माना गया है।
Q5: शिव स्तुति का पाठ करने से कौन-कौन से लाभ होते हैं?
उत्तर:
शिव स्तुति का पाठ करने से
मानसिक शांति मिलती है।
नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।
सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
शिवजी की कृपा प्राप्त होती है।
जीवन में शांति और समृद्धि आती है।
Q6: भगवान शिव को “त्रिपुरारि” क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
भगवान शिव को “त्रिपुरारि” इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने त्रिपुरासुर (तीन राक्षस राजाओं) का संहार किया था। यह उनके विनाशकारी (संहारक) रूप को दर्शाता है, जो अधर्म और असत्य को नष्ट करने के लिए आवश्यक है।
Q7: क्या शिव स्तुति का नियमित पाठ करना आवश्यक है?
उत्तर:
शिव स्तुति का नियमित पाठ करना न केवल भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मन और आत्मा को शांति प्रदान करता है। इसका नियमित जाप करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और मानसिक स्थिरता आती है।
Q8: शिवजी की महिमा अन्य देवताओं से कैसे अलग है?
उत्तर:
शिवजी की महिमा उनकी सादगी, सरलता और दया में है। वे बिना किसी जटिल विधि-विधान के, केवल जल और बिल्वपत्र से प्रसन्न हो जाते हैं। इसके अलावा, वे न केवल सृजनकर्ता और पालक हैं, बल्कि संहारकर्ता भी हैं। शिवजी का हर रूप – चाहे वह नटराज हो, महाकाल हो, या शंकर हो – उनकी अद्वितीयता को दर्शाता है।
Q9: शिव स्तुति कब और किस अवसर पर गानी चाहिए?
उत्तर:
शिव स्तुति का पाठ किसी भी समय किया जा सकता है, लेकिन विशेष रूप से सोमवार, महाशिवरात्रि, श्रावण मास, और प्रदोष व्रत के दिन इसका महत्व अधिक होता है। ये दिन भगवान शिव की पूजा और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए शुभ माने जाते हैं।
Q10: शिवजी की पूजा में कौन-कौन से मंत्र और स्तुति महत्वपूर्ण हैं?
उत्तर:
शिवजी की पूजा में निम्न मंत्र और स्तुतियां महत्वपूर्ण मानी जाती हैं:
ॐ नमः शिवाय – सबसे पवित्र और शक्तिशाली मंत्र।
महामृत्युंजय मंत्र – स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए।
शिव तांडव स्तोत्र – शिवजी की शक्ति और नृत्य की महिमा का गान।
आशुतोष शशाँक शेखर स्तुति – शिवजी की दया और उनके सौम्य स्वरूप का वर्णन।