भर दे रे श्याम झोली भर दे – भजन

भर दे रे श्याम झोली भर दे भर दे,
ना बहलाओ बातों में
दिन बीते, बीती रातें अपनी कितनी हुई रे मुलाकाते,
तुझे जाना पहचाना तेरे झुठे हुए रे सारे वादे,
भूले रे श्याम तुम तो भूले, भूले,
क्या रखा हैं वादों में, भर दे रे
नादान हैं अंजान हैं गुरु तू ही तो मेरा भगवान हैं,
तुझे चाहु तुझे पाऊ मेरे दिल का यही तो अरमान हैं,
पढ़ ले रे श्याम दिल की पढ़ ले,
सब लिख है आँखों में, भर दे रे
मेरी नैया ओ कन्हियाँ पार कर दे तू बनके खिवैया,
मैं तो हारा गम के मारा आजा आजा ओ बंसी बजाइयाँ,
लेले रे श्याम अब तो लेले,
मेरे हाथ हाथो में, भर दे रे
तू है मेरा मैं हु तेरा मैंने डाला तेरे दर पे डेरा,
मुझे आस है विश्वाश है श्याम भर देगा दामन तू मेरा,
झूमे रे श्याम नंदू झूमे,
झूमे तेरी ही बाहो में, भर दे रे,
“भर दे रे श्याम झोली भर दे” भजन का भक्ति रस से भरा सुंदर भावार्थ
यह भजन लिरिक्स “भर दे रे श्याम झोली भर दे” भक्त की गहरी श्रद्धा और विश्वास को दर्शाता है। इसमें एक भक्त अपने दुखों, पीड़ा और जीवन की चुनौतियों को सामने रखकर श्याम बाबा से कृपा की भीख माँगता है। भजन में बार-बार यह भाव आता है कि केवल श्याम ही सच्चे मार्गदर्शक और भगवान हैं, जो भक्त की नैया पार लगा सकते हैं।
भक्त अपने जीवन के दुःख और निराशा को स्वीकार करता है, लेकिन साथ ही दृढ़ विश्वास भी रखता है कि श्याम बाबा उसकी झोली भर देंगे और उसकी नैया को पार लगाएंगे। इसमें गुरु को भगवान का स्वरूप मानकर उनके चरणों में समर्पण का भाव है। अंत में यह भजन प्रेम, समर्पण और भरोसे की गहरी अभिव्यक्ति है, जिसमें भक्त कहता है – “तू है मेरा, मैं हूँ तेरा”।