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Toggleसब कुछ मिला रे भोले, रहमत से तेरी – भजन
सब कुछ मिला रे भोले,
रहमत से तेरी
तूने ही है सुनी इल्तिज़ा मेरी ।
बन के फ़कीर मैं चला राह में तेरी
तू न मिलया मुझको आस है तेरी ।
ओ सबकुछ मिला रे भोले रहमत से तेरी
तूने ही है सुनी इल्तिजा मेरी ॥
तन एक मंदिर है ,रूह एक ज़रिया,
तू ना मिलेगा चाहे खोज लो दरिया,
रहता है कहाँ पे तू किस देश भेष में
मिल जा मुझे बस सुन ले
इतनी सी फरियाद,
ना कोई अपना है, सब है पराया
तुझ से ही है मोहब्बत बेइंतिहा मेरी ।
सब कुछ मिला रे भोले,
रहमत से तेरी
तूने ही है सुनी इल्तिज़ा मेरी ।
बन के फ़कीर मैं चला राह में तेरी
तू न मिलया मुझको आस है तेरी ।
कठिन सफर में, बन के,
फ़िरा बंजारा, राह में काँटे हैं,
फिर भी क्या खूब है नज़ारा,
जानता है तू भोले हर चित्त की चोरी
तूने है थामी मेरे जीवन की ये डोरी
मेरी ये सांस तू है मेरा विश्वाश तू है
किस्मत की है ना जरूरत,
लक़ीरों को मेरी,
सब कुछ मिला रे भोले,
रहमत से तेरी
तूने ही है सुनी इल्तिज़ा मेरी ।
बन के फ़कीर मैं चला राह में तेरी
तू न मिलया मुझको आस है तेरी ।
सब कुछ मिला रे भोले,
रहमत से तेरी
तूने ही है सुनी इल्तिज़ा मेरी।
बन के फ़कीर मैं चला राह में तेरी
तू न मिलया मुझको आस है तेरी ॥
“सब कुछ मिला रे भोले” एक अत्यंत भावनात्मक और आध्यात्मिक शिव भजन है, जो श्रद्धा, समर्पण और आभार के भाव को बहुत सरल लेकिन प्रभावशाली शब्दों में प्रस्तुत करता है। यह भजन उस भक्त की व्यथा और अनुभूति को दर्शाता है जिसने जीवन की कठिनाइयों में भी शिव पर विश्वास बनाए रखा और अंततः उनकी कृपा से सब कुछ प्राप्त किया।
इस भजन लिरिक्स की शुरुआत इस स्वीकारोक्ति से होती है कि “सब कुछ मिला रे भोले, रहमत से तेरी”, जो सीधे तौर पर भोलेनाथ की कृपा का अनुभव कराता है। यह वाक्य न केवल भौतिक उपलब्धियों की बात करता है, बल्कि आत्मिक संतोष, शांति और मार्गदर्शन को भी दर्शाता है।
भजन में भक्त खुद को एक फकीर की तरह प्रस्तुत करता है, जो शिव की राह पर बिना किसी मोह-माया के चल रहा है। वह मानता है कि तन एक मंदिर है और आत्मा वह ज़रिया है जिससे भगवान को महसूस किया जा सकता है। यह गहराई से भरा हुआ संकेत है कि शिव बाहर नहीं, भीतर हैं।
इस भजन लिरिक्स में जीवन की कठिन राहों और संघर्षों की बात भी है — काँटों भरी राह, अकेलापन, लेकिन फिर भी भक्त शिव में अपनी डोर बंधी मानता है।
पंक्ति “तूने है थामी मेरे जीवन की ये डोरी” इस विश्वास को दर्शाती है कि भोलेनाथ ही जीवन की दिशा तय करते हैं।
कुल मिलाकर, यह भजन केवल एक गीत नहीं बल्कि एक साधना है — जो बताता है कि जब सब कुछ छूट जाए, तब भी अगर शिव की आस बाकी है, तो सब कुछ पाया जा सकता है।
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